58 के अलावा पप्पू यादव के लिए 7 सीटों की मांग, सीमांचल में तेजस्वी अड़े
रितेश सिन्हा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ’वोट चोर गद्दी छोड़’ के नारे का जोश अब बिहार में ठंडा पड़ चुका है। कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम अब अपनी औकात में हैं। कांग्रेस के स्क्रीनिंग कमिटी के चेयरमैन रहे अजय माकन पार्टी की पहले ही कई प्रदेशों में फजीहत करा चुके हैं। अपने उसी अंदाज में वे सचिव सीपी मित्तल सहित अपने चंपुओं के साथ बिहार पहुंचे थे। बिहार के कांग्रेसियों ने उनको भागने पर मजबूर कर दिया, लिहाजा एक दिन में वे मैदान छोड़ दिए। उत्तर बिहार में स्क्रीनिंग का जिम्मा इमरान प्रतापगढ़ी पर छोड़ दिया। इमरान खुद कभी भी स्क्रीनिंग कमिटी के सामने पेश नहीं हुए बगैर राज्यसभा में कूदने में कामयाब रहे। दक्षिण बिहार को युवा सांसद प्रीति शिंदे के हवाले कर दिया। इन दोनों हवा-हवाई नेताओं ने कुछ घंटों में ही पूरे बिहार की स्क्रीनिंग कर दी और इस कमिटी की एक्सरसाइज खत्म हो गई।
जमीनी हकीकत ये है कि कांग्रेस एक लंबे समय से अपने लिए सीटें तलाश रही थी और बिहार में 58 सीटें सर्वे के अनुसार उसने चिन्हित की थी। उसी पर केंद्रीय नेतृत्व ने अपने पर्यवेक्षकों को भेजा था। नाम न बताने की शर्त पर कांग्रेस के एक कार्यकारी अध्यक्ष ने पार्टी की रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि कांग्रेस हर जिले में 1 सीट पर तो निश्चित ही चुनाव लड़ेगी। 19 वर्तमान विधायकों की सीटों समेत कांग्रेस ने 58 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बनाया है। इन्हीं 58 सीटों में से मोकामा वाली सीट पर अब राजद के तेजस्वी ने अपना दावा ठोका है। कांग्रेस भी कहलगांव सीट पर मजबूती से दावा ठोक रही है। पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार को उतार कर अपना जीत सुनिश्चित करना चाहती है। इस सीट पर दिवंगत नेता सदानंद सिंह जदयू के साथ टेक्निकल एलायंस की वजह से जीतते आ रहे थे।
अब इसी कहलगांव मुस्लिम बाहुल्य सीट पर भागलपुर जिलाध्यक्ष परवेज जमाल का दावा मजबूत माना जा रहा है। धन-बल, छल और खास चीज की पेशगी के बूते प्रवीण कुशवाहा भी इस सीट को हथियाने में जुटे हैं। अब तक उन्होंने जो चाहा, वो पार्टी में पाया है। चर्चित पापरी बोस के नायक रहे प्रवीण कुशवाहा की वजह से आज प्रदेश कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता बिहार में केवल सड़क नाप रहे हैं। कांग्रेस एक दलित सीट पर भी दावा ठोक रही है। पूर्णिया लोकसभा के अंतर्गत बनमनखी से दलित पूर्व मुख्यमंत्री रहे डॉ भोला पासवान शास्त्री के परिवार से अर्जुन पासवान को लड़ाने का मन बना चुकी है। इस परिवार की उपेक्षा से खासा नाराज राजद के मंसूबों को पिछले 6 चुनावों से पलीता लगा रहा है। माकन ने अपनी साख बचाने के लिए राहुल के दलित एजेंडे को आगे कर इस सीट पर कांग्रेस ने अपना दावा मजबूती से ठोका है। बाहुबली सांसद पप्पू यादव कांग्रेस के सिंबल पर अपना खेल खेलते हुए पार्टी के लिए 10 के दावे पीछे हटते हुए 7 पर आ गए हैं। बिहार कांग्रेस की एक बड़ी लड़ाई गयाजी विधानसभा सीट को लेकर भी है।
बिहार सरकार के एक बड़े नेता व मंत्री प्रेम कुमार हार के डर से वहां के वर्तमान कांग्रेसी मेयर मोहन श्रीवास्तव का टिकट कटवाने की पूरी तैयारी में जुटे हैं। ईबीसी और ओबीसी वोट के चक्कर में वोटों का खेल समझाते हुए ओबीसी चेयरमैन अनिल यादव भी एक समीकरण के साथ कांग्रेस की जयहिंद करने में जुटे हैं। एक नई राजनीति अब बिहार में चल रही है। अब अपने सामने कांग्रेसी कमजोर उम्मीदवार को उतारने व अपनी जीत सुनिश्चित करने में लिए अपनी पसंद का कांग्रेसी उम्मीदवार उतरवा लेते हैं। इसमें लेन-देन का बड़ा सौदा होता है। चुनाव से पूर्व यह खेल खुल गया। इसकी चर्चा बिहार में जबर्दस्त तरीके से हो रही है।
बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने पिछली बार प्रवीण कुशवाहा को भागलपुर से लाकर पटना में उम्मीदवार बनवा लिया था और आसानी से चुनाव जीतकर वे सदन में पहुंचे थे। 2015 का चुनाव वे लगभग हार चुके थे। यादव होने की वजह से लालू यादव ने अपने उम्मीदवार की हार की घोषणा कराते हुए नंदकिशोर यादव को विधानसभा पहुंचने का मौका दिया। कांग्रेस के एक और बड़े खिलाड़ी अखिलेश सिंह राजद सुप्रीमो लालू की कृपा से प्रदेश के अध्यक्ष बने, दो-दो बार राज्यसभा बने। अब वे हर दूसरे दिन तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने के बयान जारी कर रहे हैं। कांग्रेस कोटे से अगर उनके पुत्र आकाश को टिकट नहीं मिला तो राजद का टिकट मिलना निश्चित है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व एमएलसी मदन मोहन झा भी अपने बेटे को कांग्रेस का टिकट न मिलने की सूरत में राजद कोटे से लड़वाने के फिराक में हैं। हालांकि राहुल गांधी ईबीसी उम्मीदवारों को कांग्रेसी कोटे से चुनाव लड़वाने की बात दोहराते रहे। बकौल राजद के बाहुबली नेता राजवल्लभ यादव ने स्वीकार किया कि तेजस्वी अब यादवों के बीच भी अपनी पकड़ खो चुके हैं। राहुल गांधी के पीछे लगी ईबीसी की भीड़ राजद उम्मीदवारों के पक्ष में आएगी, इसमें संदेह है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने दौरे के जरिए बिहार में जो हवा बनाई थी, जिससे कांग्रेसी मानने लगे थे कि पार्टी अकेले भी चुनाव लड़ सकती है।
प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के खेमों से यह खबर चलवाई जा रही थी कि कांग्रेस 110 से कम पर चुनाव नहीं लड़ेगी, अब उन कांग्रेसियों के हौसले पस्त हैं। आपको बताते चलें कि कांग्रेस लौरिया, नवतन, चनपटिया, रक्सौल, गोविंदगंज जैसे उन सीटों पर उम्मीदवार बदलेगी जहां 2020 में 20000 से अधिक वोटों से पार्टी चुनाव हारी है। देखना है कि कांग्रेस किन सीटों पर उम्मीदवार बदलती है या फिर सिफारिशी उम्मीदवार धन-बल और रसूख के जरिए कामयाब होंगे। कांग्रेस में टिकट के दावेदार दिल्ली में डेरा जमा चुके हैं। स्क्रीनिंग से जुड़े नेता इनसे बचते फिर रहे हैं। कांग्रेसी दावेदार तो बढ़ गए, सीटें वहीं की वहीं हैं। ऐसे में पार्टी से जुड़े नेता टिकट न मिलने पर किसका समर्थन कर बैठेंगे, ये सोचकर बड़े-बड़े नेताओं के हाथ-पैर फुले हुए हैं।

रितेश सिन्हा















