लखनऊ का ऐतिहासिक गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल लाइब्रेरी जगत सिनेमा रोड, छेदीलाल धर्मशाला के समीप स्थित है। यह एक सार्वजनिक पुस्तकालय है, जहाँ बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक निःशुल्क अध्ययन कर सकते हैं। इस पुस्तकालय का महत्व इसके समृद्ध साहित्यिक और ऐतिहासिक संग्रह में निहित है, जो शोधकर्ताओं और ज्ञान-पिपासुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

बाबू गंगा प्रसाद वर्मा
गंगा प्रसाद वर्मा: एक परिचय
गंगा प्रसाद वर्मा जी का जन्म 13 अगस्त 1863 को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पिहानी कस्बे में हुआ था। विद्यार्थी जीवन में ही वे लखनऊ आ गए और यहीं उनकी कर्मभूमि बनी। 1883 में मात्र 20 वर्ष की आयु में उन्होंने उर्दू अखबार ‘हिन्दुस्तानी’ का प्रकाशन प्रारंभ किया और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रूप से प्रवेश किया। वे समाज सुधार और शिक्षा के प्रति अत्यंत समर्पित थे और इसी भावना से उन्होंने लखनऊ में एक सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना का संकल्प लिया।
गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल हॉल एवं पुस्तकालय की स्थापना
गंगा प्रसाद वर्मा जी अमीनाबाद में एक सार्वजनिक पुस्तकालय स्थापित करना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए भूमि खरीदी और भवन निर्माण की योजना बनाई, किंतु उनके जीवनकाल में यह सपना पूरा नहीं हो सका। 1914 में उनके निधन के पश्चात, उनके अनुयायियों और प्रशंसकों ने उनके स्वप्न को साकार करने हेतु गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल हॉल एवं पुस्तकालय की स्थापना का निर्णय लिया।
इस पुस्तकालय की स्थापना में पंडित गोकरननाथ मिश्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 10 मार्च 1923 को प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं नेता सर तेज बहादुर सप्रू ने इसकी आधारशिला रखी और 14 मार्च 1925 को गवर्नर सर विलियम सिन्कलेर मेरिस ने इसका उद्घाटन किया। इस पुस्तकालय का निर्माण 1,20,000 रुपये की लागत से किया गया था, जो उस समय के हिसाब से एक बड़ी राशि थी।
स्वतंत्रता के बाद पुस्तकालय का पुनरुद्धार
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात, इस पुस्तकालय और सभागार का संचालन उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंद्रभानु गुप्त के संरक्षण में आया। उन्होंने इसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया और इसके पुनरुद्धार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
आज यह पुस्तकालय लखनऊ की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रतिष्ठित है। यहाँ दुर्लभ पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं का संग्रह उपलब्ध है, जो शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
उल्लेखनीय विशेषताएँ
- पुस्तकालय में दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज, ग्रंथ और पत्र-पत्रिकाएँ उपलब्ध हैं।
- अध्ययन कक्ष में विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पढ़ाई की सुविधा।
- साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए सभागार।
- शोधार्थियों के लिए विशेष संदर्भ सामग्री।
गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल लाइब्रेरी न केवल ज्ञान और शिक्षा के प्रसार का केंद्र है, बल्कि यह लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भी जानी जाती है। यह पुस्तकालय नई पीढ़ी को ज्ञान के प्रति प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम बना हुआ है।