हिंदुस्तान नामा | लखनऊ, 15 जुलाई 2025
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मंगलवार को लखनऊ की एमपी-एमएलए विशेष अदालत में मानहानि मामले में बतौर आरोपी पेश हुए। यह मामला वर्ष 2018 में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान दिए गए एक विवादित बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कथित रूप से भारतीय सेना और संघ परिवार के खिलाफ टिप्पणी की थी। इस पर एक स्थानीय बीजेपी नेता और एक पूर्व सैनिक की शिकायत पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया।

कोर्ट में पेशी और जमानत
राहुल गांधी मंगलवार सुबह लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। वहां से वह सीधे कैसरबाग स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट पहुंचे। कोर्ट में उनकी पेशी के दौरान सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू रही। राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे, जिनमें अविनाश पांडे,अजय राय, प्रमोद तिवारी, पीएल पुनिया, आराधना मिश्रा ‘मोना’ और किशोरी लाल शर्मा शामिल रहे।

पेशी के दौरान राहुल गांधी ने कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके तुरंत बाद उनके वकीलों ने जमानत अर्जी दाखिल की, जिसे अदालत ने मंजूर करते हुए 20-20 हजार रुपये के दो जमानती बॉन्ड पर उन्हें जमानत दे दी। सुनवाई के बाद राहुल गांधी बिना किसी मीडिया बयान के कोर्ट परिसर से रवाना हो गए।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन और प्रशासन पर नाराजगी
राहुल गांधी की पेशी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह और जोश दिखा। सैकड़ों कार्यकर्ता झंडे लेकर अदालत परिसर के बाहर जमा हुए। हालांकि, इसी दौरान कांग्रेस नेताओं ने लखनऊ प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार और कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया।
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के नि० प्रदेश महा सचिव शान हैदर आज़मी ने प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा, “पुलिस ने जानबूझकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को झंडा लहराने और अपने नेता का स्वागत करने से रोका। ट्रैफिक नियंत्रण के नाम पर अव्यवस्था की गई, जिससे राहुल गांधी की सुरक्षा को खतरा हो सकता था।”
कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब बीजेपी के मंत्री लखनऊ आते हैं, तब प्रशासन उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, लेकिन देश के प्रमुख विपक्षी नेता के लिए न्यूनतम प्रोटोकॉल का पालन तक नहीं किया गया।

मामला क्या है?
यह केस राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है, जो उन्होंने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान दिया था। आरोप है कि उन्होंने भारतीय सेना को लेकर ऐसा वक्तव्य दिया, जिसे “अपमानजनक” और “सेना का मनोबल तोड़ने वाला” बताया गया। कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया मानहानि की श्रेणी में पाया और उन्हें आईपीसी की धाराओं 499 और 500 के तहत आरोपी बनाते हुए समन जारी किया।
कांग्रेस का रुख: ‘राजनीतिक प्रतिशोध’
कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक प्रतिशोध की संज्ञा दी है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी के बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उनका उद्देश्य भारतीय सेना का अपमान नहीं था, बल्कि सरकार की कार्यशैली पर आलोचनात्मक टिप्पणी करना था।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, “यह सरकार राहुल गांधी की लोकप्रियता और जनसमर्थन से डरती है। इसलिए राजनीतिक मामलों को कोर्ट में घसीटा जा रहा है।”
बीजेपी की प्रतिक्रिया
वहीं भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के बयान को देशविरोधी और सेना का अपमान बताते हुए तीखी आलोचना की। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि “सेना पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर राहुल गांधी ने देश की आत्मा को चोट पहुंचाई है। उन्हें कानून का सम्मान करते हुए कोर्ट में सफाई देनी चाहिए।”
कानूनी दृष्टिकोण
भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत मानहानि दंडनीय अपराध है। दोष सिद्ध होने पर अधिकतम दो साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। हालांकि, यह अपराध जमानती है, और अधिकांश मामलों में आरोपियों को पेशी के दौरान ही जमानत मिल जाती है।

कोर्ट रूम में राहुल गांधी के साथ सेल्फ़ी लेते वकील। (स्रोत: सोशल मीडिया)
अगली सुनवाई 20 अगस्त को
राहुल गांधी के वकीलों ने अदालत से भविष्य की व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की है, जिस पर कोर्ट विचार करेगा। फिलहाल कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2025 को निर्धारित की है। उस दिन यह तय होगा कि ट्रायल शुरू होगा या नहीं।
राहुल गांधी की लखनऊ में हुई पेशी ने जहां राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, वहीं कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा प्रदर्शन का मौका भी बन गया। आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि यह मामला केवल एक कानूनी प्रक्रिया बनकर रह जाता है या कांग्रेस इसे सत्ताधारी दल के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करती है।
हिंदुस्तान नामा इस घटनाक्रम पर लगातार नज़र बनाए हुए है और आगामी अदालती कार्रवाई की हर महत्वपूर्ण जानकारी अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।















