चुनाव विशेष
’सीट चोर कांग्रेस छोड़’ नारे के चुनाव कैंपेन, 12 सीटों पर होगा दोस्ताना मुकाबला
रितेश सिन्हा
बिहार कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, सदन के नेता शकील अहमद, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, स्क्रीनिंग चेयरमैन समेत अन्य नेताओं पर सीट बेचने के संगीन आरोप लगाए हैं। ’वोट चोर’ के नारे के साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की यात्रा के बाद बने माहौल को इन नेताओं ने टिकटों को बेचकर भारी कीमत वसूली है। सोशल मीडिया पर ऐसी बातों पर चर्चाएं आम हैं। कांग्रेसी नेता से लेकर कार्यकर्ता तक सीट चोरी के आरोप के साथ प्रदेश में हंगामा मचाए हुए हैं। इनका मानना है कि अकारण वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में पूर्व विधायक व नेता सदन रहे विजय शंकर दुबे, जमालपुर से विधायक रहे अजय सिंह, खगड़िया के छत्रपति यादव, कसबा से अफाक आलम के टिकट काट दिए गए। इनका आरोप है कि एक बड़ी रकम मांगी जा रही थी, जिसके इंकार और टाल-मटोल की सजा के तौर पर टिकट काट दिया गया।
टिकट के जिन दावों के दावे को नजरंदाज किया गया है, उनमें लालगंज से पूर्व मंत्री वीणा शाही, जिनकी यह परंपरागत सीट रही है। इस सीट पर 1952 से ही इस परिवार का दबदबा रहा है। इसका प्रतिनिधित्व पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय ललितेश्वर शाही करते रहे हैं, जो सीडब्लूसी कार्यसमिति, चुनाव समिति व अनुशासन समिति के अध्यक्ष भी रहे। विदित हो कि इस सीट से एक घोषित अपराधी, जो फिलहाल जेल में हैं, उनके परिवार को जिताने के लिए कांग्रेस से एक पार्षद के भाई को टिकट दिया गया था ताकि चुनाव आसानी से जीत सकें। अब आखिरी वक्त पर उसने लड़ने से इंकार किया और राजद ने उन्हें टिकट देकर अपने पाले में खींचते हुए जीत सुनिश्चित करने की भरपूर कोशिश की। दूसरा दिलचस्प मामला बरबीघा का है, वहां पूर्व में 113 वोटों से हारे पूर्व विधायक गजानंद उर्फ मुन्ना शाही को टिकट से मरहूम कर दिया। मुन्ना का परिवार आजादी से पूर्व कांग्रेसी चर्चित परिवार रहा है। 1978 में बेलछी में हुए दलित नरसंहार के बाद एनएसयूआई के तत्कालीन अध्यक्ष श्याम सुंदर सिंह धीरज के साथ इंदिरा गांधी ने बेलछी यात्रा उनके पालतू हाथी के जरिए की थी। इसके बाद कांग्रेस का माहौल बना और दोबारा सत्ता में वापसी हो गई।
कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पैसे का खेल कहलगांव में भी खेला गया। ऐसी चर्चा है कि बड़े लेन-देन के साथ यहां से प्रवीण सिंह कुशवाहा को ऐन वक्त पर टिकट थमाया गया। प्रवीण कुशवाहा के पापरी बोस कांड जैसे कुकृत्यों की वजह से बिहार में कांग्रेस का सफाया हो गया था, जिसके बाद अब तक वापसी नहीं हो सकी है। प्रवीण कुशवाहा पहले भी चर्चा में थे, जब राहुल गांधी के सहायक के साथ कार्यकारी अध्यक्ष के लिए 20 लाख रूपए की डील का आरोप लगा, मामला गांधी मैदान थाने में दर्ज हुआ। कांग्रेसी सिंबल मिलने के बाद फिलहाल मामला रफा-दफा हो गया। पूर्णिया के कसबा सीट से विधायक रहे अफाक आलम का टिकट भी काट दिया गया। इसके बदले में सांसद पप्पू यादव के चहेते जितेंद्र यादव को टिकट दे दिया गया जिसमें भी भारी लेन-देन का खेल बताया जा रहा है।
एक और दिलचस्प मामला खगड़िया का है। यहां पिछला चुनाव जीतने वाले छत्रपति यादव का टिकट काटा गया। यहां से पिछली बार खगड़िया के ही बेलदौर सीट से चुनाव हारने वाले चर्चित चंदन यादव को टिकट दिया गया। चंदन यादव की पत्नी प्रोफेसर मधुमिता चक्रवर्ती कांग्रेस नेता राहुल गांधी के निजी कार्यालय में आला मुकाम रखती हैं। मधुमिता का चंदन यादव की अब तक की राजनीतिक उपलब्धियों में उनका खासा योगदान है। चंदन को विधायक बनाने के लिए छत्रपति का टिकट कटवाया गया। गयाजी में भी बड़ा खेल हुआ। ऐसी चर्चा है कि ऐन वक्त पर एक बड़ी बोली के साथ टिकट मोहन श्रीवास्तव उर्फ अखौरी आेंकार नाथ को मिल गया। इससे पहले बाहर से धन पशुओं को लाया गया था। बकायदा स्क्रीनिंग कमिटी ने नैना देवी के पीछे हटने के बाद जदयू के नगर अध्यक्ष बिल्डर व कथित भू-माफिया राजू बर्नवाल का टिकट पर मोहर लगा दी थी। मगर उम्मीदवार के खुद पीछे हटने के बाद मोहन श्रीवास्तव की लॉटरी लग गई।
बिहार चुनाव में प्रभारी का होटल से लेकर बाकी सब सुख-सुविधाओं को उपलब्ध करा रहे झारखंडी अमित कुमार टुन्ना का नाम 30 हजार से चुनाव हारने के बाद भी पहली सूची में जारी होते ही उन्हें सिंबल दे दिया। एक मामला बेगूसराय का भी है जहां अमिता भूषण को टिकट मिला है जिनका पिछली बार टिकट काट दिया गया था। चर्चाएं हैं कि बड़ी बोली के साथ इस सीट को उन्होंने झटक लिया। इस सीट पर कन्हैया ने बकायदा दमखम दिखाते हुए रैली आयोजित की थी जिसमें राहुल गांधी भी पहुंचे थे। मगर किसी भी कीमत पर टिकट लेने की जिद ने अमिता भूषण को फिर एक बार उम्मीदवार बना दिया। कांग्रेसी नेता एवं कार्यकर्ता खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि ऐसी दर्जनों सीटें हैं जिन पर खुला कारोबार हुआ है।
लगभग 12 ऐसी सीटें हैं जिन पर महागठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। 6 पर राजद, 4 पर सीपीआई और कांग्रेसी सीटों पर ताल ठोक रहे हैं, जबकि 1 सीट पर वीआईपी और राजद आमने-सामने है। वैशाली में अजय कुशवाहा बनाम संजीव सिंह, सिकंदरा में विनोद चौधरी बनाम उदय नारायण चौधरी, कहलगांव में प्रवीण कुशवाहा और रजनीश आनंद, सुल्तानगंज से ललन और चंदन सिन्हा, नरकटियागंज में शास्वत केदार पांडेय और दीपक यादव, वार्सलीगंज में मंटन सिंह और अनिता यादव ये सभी राजद और कांग्रेस के आमने-सामने हैं। वहीं बछवाड़ा में अवधेश राय और गरीब दास, राजापाकर से मोहित पासवान और प्रतिमा दास, बिहार शरीफ से शिव कुमार यादव और उमेर खान, कहर सीट से नरेंद्र गुप्ता और संतोष मिश्रा, सीपीआई और कांग्रेस आमने-सामने हैं। वीआईपी और राजद भी दो सीटों पर उलझी है, इनमें चैनपुर से बालगोविंद और बृजकिशोर, वहीं बाबूबरही से बिंदू गुलाब यादव और अरूण कुशवाहा में दोस्ताना मुकाबला है।
महागठबंधन में टिकटों की मारामारी में कांग्रेस के अलावा राजद, जेएएमएम और वीआईपी में भी है। झामुमो ने राजद और कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए चुनाव लड़ने से इंकार करते हुए अपने दावे को छोड़ दिया। ’वोट चोर गद्दी छोड़’ का नारे लगाने वाले बिहार कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता अब अपनी ही पार्टी के कोषाध्यक्ष अजय माकन, प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, नेता सदन शकील अहमद के खिलाफ ’सीट चोर कांग्रेस छोड़’ के नारे बुलंद कर रहे हैं। फिलहाल तापमान गर्म है। ऐसी चुनाव कैंपेन में पहुंचे अशोक गहलोत, अधीर रंजन चौधरी, भूपेश बघेल के साथ अपने प्रदेशों के कांग्रेसी तोपची, कई प्रदेशों के प्रभारी एक-एक जिले के एक-एक सीट पर कितना डैमेज कंट्रोल कर पाएंगे, ये चुनावी नतीजों से ही पता लग सकेगा।

रितेश सिन्हा















