नई दिल्ली | हिंदुस्तान नामा
दिल्ली के प्रतिष्ठित LTG ऑडिटोरियम में हाल ही में एक ऐसा मंचन हुआ जिसने दर्शकों को न केवल गहराई से छुआ, बल्कि उन्हें सोचने पर भी मजबूर कर दिया। Films Unfiltered और Karvaan Theatre के संयुक्त सहयोग से प्रस्तुत हिंदी नाटक “प्ले क्यों..?” को दर्शकों ने भरपूर सराहना दी और अंत में कलाकारों को स्टैंडिंग ओवेशन से सम्मानित किया।
कहानी जो दिल तक उतर जाए
सुरेन्द्र सागर द्वारा लिखित और निर्देशित यह नाटक एक दंपति — आनंद और सुनंदा — के रिश्तों में आए उस मोड़ को बयान करता है, जब 25 वर्षों के वैवाहिक सफर के बाद उनकी ज़िंदगी पर गहरा संकट आ जाता है। पति की लत और लापरवाही से न केवल व्यापार में भारी नुकसान होता है, बल्कि पत्नी पर मानसिक और आर्थिक दोनों तरह का दबाव बढ़ जाता है।
यह प्रस्तुति उन अनकहे संघर्षों और मौन सहनशीलता पर रोशनी डालती है, जो आमतौर पर घर की चारदीवारी के भीतर कैद रह जाती हैं।

अभिनय जिसने मंच को जीवंत कर दिया
नाटक में शिखा मल्होत्रा (सुनंदा) और अतुल ढींगरा (आनंद) ने अपनी गहन और भावनात्मक अदाकारी से पात्रों को जीवंत बना दिया। उनकी क्रिएटिव डायरेक्शन ने न केवल दृश्यों में सहजता लाई, बल्कि दर्शकों को कहानी में डूबने का मौका दिया।
वरिष्ठ कलाकार गिन्नी बब्बर और शिवानी राय ने अपने अभिनय से इस नाटक की भावनात्मक परतों को और भी समृद्ध कर दिया।

तकनीकी सहयोग और माहौल
लाइव संगीतकार विश्णु और कार्तिक ने सुरों से संवादों को भावनात्मक गहराई दी, जबकि सौरव की लाइट डिज़ाइन ने दृश्यों के मूड और टोन को बखूबी संवारा।
विशेष आभार और प्रेरणा
रिज़वान सर की गरिमामयी उपस्थिति और प्रेरणादायक शब्दों ने पूरी टीम का मनोबल बढ़ाया।
संजना बुक्स प्रकाशन और अरविंद गौड़ के निरंतर सहयोग और कला-संस्कृति के प्रति समर्पण ने इस रचनात्मक सफर को नई दिशा दी।

दर्शकों के दिल में छोड़ी गूंज
“प्ले क्यों..?” महज़ एक नाटक नहीं, बल्कि एक भावनात्मक आईना है, जो दर्शकों को रिश्तों में छिपी पीड़ा, उम्मीद और सहनशीलता से रूबरू कराता है। सकारात्मक प्रतिक्रिया और बार-बार होने वाली तालियों ने यह साफ कर दिया कि आनंद और सुनंदा की कहानी यहीं खत्म नहीं होती — वे फिर लौटेंगे, शायद एक नई कहानी लेकर।














