उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए निर्णय जिसके तहत 50 से कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर निकट के विद्यालयों में मर्ज (पेयरिंग) किया जाएगा — के खिलाफ आज एनएसयूआई ने प्रदेश की राजधानी में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। इस निर्णय के चलते अनुमानतः 27,000 से अधिक विद्यालय पूरे प्रदेश में बंद हो जाएंगे, जिससे लाखों छात्रों की शिक्षा प्रभावित होगी।
एनएसयूआई मध्य जोन के अध्यक्ष अनस रहमान एवं पूर्वी जोन के अध्यक्ष ऋषभ पाण्डेय के संयुक्त नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में छात्रों ने आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से विधानसभा की ओर मार्च निकाला। मौके पर भारी पुलिस बल ने बैरीकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन जब छात्र उग्र हुए और बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े, तो पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हो गई।

प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए अनस रहमान ने कहा कि “कल्याणकारी राज्य में सरकार का उद्देश्य सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होता है। पूर्ववर्ती सरकारों ने इसी सोच के तहत काम किया और कांग्रेस सरकार ने संविधान के 86वें संशोधन द्वारा शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया। लेकिन भाजपा की योगी सरकार बच्चों से उनका यह अधिकार छीनना चाहती है ताकि उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी ही न हो और वे सरकार के खिलाफ आवाज न उठा सकें।”
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। सरकारों ने इसी उद्देश्य से हर किलोमीटर पर विद्यालय खोलने का प्रयास किया, लेकिन वर्तमान सरकार उन्हें बंद कर रही है ताकि ‘शिक्षा नहीं, नफरत की पाठशालाएं’ चलाई जा सकें।

अनस रहमान ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो अगले 25 दिनों में एनएसयूआई एक बड़ा आंदोलन छेड़ेगी, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी भी शामिल होंगे।
वहीं, एनएसयूआई पूर्वी जोन के अध्यक्ष ऋषभ पाण्डेय ने कहा कि “योगी सरकार निजी विद्यालयों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्कूलों की अनदेखी कर रही है। प्राइवेट स्कूल बच्चों को 3-4 साल की उम्र में दाखिला दे देते हैं, जबकि सरकारी स्कूल में दाखिले की उम्र 6 वर्ष है। इस कारण बच्चे प्राइवेट स्कूल में चले जाते हैं और वापस लाना मुश्किल हो जाता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्री-प्राइमरी शिक्षा देने की बात करती है, लेकिन ये केवल कागजों तक सीमित हैं। साथ ही आरटीई के प्रावधानों के बावजूद प्राइवेट स्कूलों को खुलेआम मान्यता दी जा रही है, जिससे सरकारी विद्यालय कमजोर हो रहे हैं।
प्रदर्शन में पूर्वी जोन प्रभारी अनुराग त्रिवेदी, प्रदेश उपाध्यक्ष आफताब जाफरी, आर्यन मिश्रा, अजय बागी, अहमद, तनु आर्या, निशात फातिमा, तौसीफ इलाही, और अखिलेश यादव सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता शामिल रहे।















