लखनऊ, 27 जून 2025 — प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में ओबीसी कांग्रेस द्वारा ‘मध्य पूर्व संकट और विदेश नीति की विफलता’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में कांग्रेस नेताओं और बुद्धिजीवियों ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर गंभीर प्रश्न उठाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओबीसी कांग्रेस जिला अध्यक्ष शमीम कुरैशी ने की और संचालन प्रदेश प्रवक्ता अलीमुल्ला खान ने किया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने कहा कि मोदी सरकार की विफल विदेश नीति के चलते भारत न केवल ईरान जैसे पारंपरिक मित्र देशों से दूर हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी आवाज भी कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी द्वारा लिखे लेख से सीख लेकर अपनी विदेश नीति को पुनः दिशा देनी चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस संगठन महासचिव अनिल यादव ने कहा कि अगर महात्मा गांधी आज होते तो फिलिस्तीन के समर्थन में मार्च निकालते, नेहरू संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन की आज़ादी की वकालत करते, और इंदिरा गांधी लाल क़िले से यासिर अराफात के माध्यम से साम्राज्यवाद को चुनौती देतीं। उन्होंने मोदी सरकार पर इज़राइल का पक्ष लेकर भारत को शर्मसार करने का आरोप लगाया।
पूर्व मंत्री डॉ मसूद ने कहा कि दुनिया आज दो ध्रुवों में बंट चुकी है और भारत की कोई स्पष्ट भूमिका नहीं है। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता खामनाई की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने तीसरा विश्व युद्ध टाल दिया।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शारिक अब्बासी ने आरोप लगाया कि भारत और पाकिस्तान के बीच झड़प पर अमेरिकी हस्तक्षेप और मोदी की चुप्पी ने भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाया है।
कांग्रेस नेता संजय शर्मा ने कहा कि आरएसएस चुनाव जीतने की होड़ में भारत को सूडान और नाइजीरिया जैसी स्थिति में पहुंचा सकता है। उन्होंने ईरान को भारत का स्वाभाविक मित्र बताया।
वरिष्ठ पत्रकार ओबैदुल्ला नासिर ने कहा कि भारत एक समय गुटनिरपेक्ष आंदोलन का अगुआ था, लेकिन अब उसकी आवाज वैश्विक मंच पर कमजोर हो गई है। पत्रकार शकील रिज़वी ने कहा कि भारत की आंतरिक सांप्रदायिक नीति का प्रभाव विदेश नीति पर भी दिख रहा है।
कांग्रेस नेत्री ऋचा कौशिक ने कहा कि शांति ही व्यापार और विकास की नींव है, और भारत को ईरान-इज़राइल युद्ध में शांति की अपील करनी चाहिए थी।

कांग्रेस नेता नावेद नक़वी ने कहा कि मोदी सरकार अपने पड़ोसी देशों से भी संबंध नहीं निभा पाई, जिससे नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे देश चीन के करीब हो गए।
नेता सिद्धार्थ प्रिय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विवाद में अमेरिकी हस्तक्षेप से भारत की विदेश नीति की कमजोरी उजागर होती है।
अल्पसंख्यक कांग्रेस के निवर्तमान महासचिव मुहम्मद उमैर और अख्तर मलिक ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर जमकर हमला बोला और कहा कि “नमस्ते ट्रम्प” जैसे नारों से भारत की गरिमा कम हुई है।
बाराबंकी कांग्रेस अध्यक्ष मोहसिन खान ने कहा कि केवल कांग्रेस ही वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट पक्ष रखती है, जबकि अन्य क्षेत्रीय दल चुप रहते हैं।
शमीम खान, शमसुल हसन उमरा, मेराज वली खान, मसूद खान, अनीस अख्तर मोदी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे और कहा कि मजबूत विदेश नीति के लिए मजबूत और स्वदेशी नेतृत्व जरूरी है, जो मोदी सरकार में नदारद है।
गोष्ठी में कांग्रेस शहर अध्यक्ष डॉ. शहज़ाद आलम, शाहनवाज़ खान, सलमान जिया, शिवशंकर निषाद, अहमद रज़ा खान, नोमान खान समेत कई वरिष्ठ कांग्रेसजन मौजूद रहे।
गोष्ठी का समापन ओबीसी कांग्रेस द्वारा गुटनिरपेक्ष आंदोलन को फिर से मजबूत करने की अपील के साथ हुआ।















