
हालांकि इसके बावजूद डॉक्टरों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि कौन से ट्यूमर बहुत तेजी से बढ़ते हैं, जिसके चलते कई पुरुषों को इलाज के लिए मजबूर होना पड़ता है। शोध टीम के प्रोफेसर कोलिन कूपर ने कहा कि 1785 ट्यूमर सैंपल की जांच की और इस बीमारी को डीईएसएनटी उपकोशिकाएं की बढ़ती संख्या से जोड़ा। शोध बताता है कि अगर आपको ट्यूमर है तो इसका मतलब है कि आपमें डीईएसएनटी उपकोशिकाएं ज्यादा हैं और आपको मेटास्टेटिक बीमारी होने की संभावना अधिक है। इतना ही नहीं इसके शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैलने की संभावना होती है।
ई-सिगरेट पीने से हो सकता है ब्लैडर कैंसर
वैज्ञानिकों को ई-सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के यूरिन में ब्लैडर कैंसर से जुड़े पदार्थ मिले हैं। यूरोपियन यूरोलॉजी ऑन्कोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित समीक्षा अनुसंधान में 22 अलग-अलग अध्ययनों के परिणामों का मूल्यांकन किया गया। इसमें ई-सिगरेट या तंबाकू उत्पादों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों के यूरिन का विश्लेषण किया गया।
शोध के सहलेखक मार्क बुर्जलिन के मुताबिक धूम्रपान को यूरिन के ब्लैडर कैंसर की प्रमुख वजह माना गया। ई-सिगरेट का सबसे अधिक प्रभाव फेफड़े पर पड़ता है। शोध में विशेषज्ञों ने उन पदार्थो के खतरों का विश्लेषण किया, जो यूरिन के ब्लैडर कैंसर की वजह बन सकते हैं। बुर्जलीन और उनके सहयोगियों ने ई-सिगरेट के 40 अलग-अलग कंपाउंड का विश्लेषण किया और पाया कि यह 63 विभिन्न प्रकार के कैंसर पैदा करने वाले कारक शरीर में भेजता है। इन रसायनों में से छह यूरिन के ब्लैडर कैंसर की वजह बनते हैं।
source: Jagran.com